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Sunday, August 7, 2022

मसाईमारा के जंगल (Masaimara Ke Jangal)

 

मसाईमारा के जंगल

शिवमूर्ति

    जंगल के प्रति मेरा आकर्षण बचपन से रहा है। शायद इसका कारण बचपन में सुनी गयी वे कहानियां और गीत हैं जिनमें जंगल बार-बार आता है। किसी राजकुमार को देश निकाला होता था तो वह जंगल की राह पकड़ता था। राम और पॉडव जंगल-जगल भटके थे। कोई राजा अपनी रानी से नाराज हो जाता था तो या तो वह महल के बाहर कउआ हकनी बन कर गुजारा करती थी या जंगल में चली जाती थी।

एक बन गइली, दूसरे बन गइली, तिसरे बन ना!

मिले गोरू चरवहवा तिसरे बन ना!!

    तीसरे वन में जाते-जाते चरवाहे मिल जाते थे। वे रानी के दुख से दुखी होते थे। भूखी प्यासी रानी को दूध पिलाते थे।

कहानी ऐसे मिली