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Wednesday, August 10, 2022

यत्र विश्‍वं भवत्येक नीडम् (Yatra Vishwam Bhavatyek Needam)

 

यत्र विश्‍वं भवत्येक नीडम्


शिवमूर्ति

    अज्ञात के प्रति आकर्षण दुर्निवार होता है।

    घर के ठीक पीछे से होकर पक्की सड़क गुजरती थी। उस पर स्टेयरिंग सँभाले ट्रक या बस के ड्राइबरों को गुजरते देखता तो लगता कि दुनिया में सबसे खुशकिस्मत लोग यही हैं। पता नहीं कहाँ-कहाँ तक घूमते हैं। बड़े होकर ड्राइवर ही बनेंगे और जहाँ तक मन करेगा, घूमते रहेंगे। यदि इन बड़ी गाड़ियों के पीछे कोई छोटी गाड़ी जाती दिखती तो समझते कि यह आगे जाने वाली बड़ी गाड़ी का बच्चा है। पीछे छूट गया है।

कहानी ऐसे मिली